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mahabharat 3.276.13: उनके शरीर वज्र के समान दृढ़ और अभेद्य थे। वे अपार बल के धाम थे। उनका बल और पराक्रम उनकी इच्छानुसार प्रकट होता था। वे सभी युद्धकला में निपुण थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.276.13 
वज्रसंहनना: सर्वे सर्वे चौघबलास्तथा।
कामवीर्यबलाश्चैव सर्वे युद्धविशारदा:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
उनके शरीर वज्र के समान दृढ़ और अभेद्य थे। वे अपार बल के धाम थे। उनका बल और पराक्रम उनकी इच्छानुसार प्रकट होता था। वे सभी युद्धकला में निपुण थे॥13॥
 
Their bodies were as strong and impenetrable as thunderbolts. They were the abode of immense strength. Their strength and valour manifested as per their wish. All of them were adept in the art of fighting.॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)