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mahabharat 3.276.1: मार्कण्डेयजी कहते हैं- राजन! इसके बाद रावण से पीड़ित ब्रह्मर्षि, देवर्षि और सिद्धों ने अग्निदेव को आगे बढ़ाया और भगवान ब्रह्मा की शरण में गये। 1॥   |   mahabharat अध्याय 3.276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 276: देवताओंका ब्रह्माजीके पास जाकर रावणके अत्याचारसे बचानेके लिये प्रार्थना करना तथा ब्रह्माजीकी आज्ञासे देवताओंका रीछ और वानरयोनिमें संतान उत्पन्न करना एवं दुन्दुभी गन्धर्वीका मन्थरा बनकर आना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  3.276.1 
मार्कण्डेय उवाच
ततो ब्रह्मर्षय: सर्वे सिद्धा देवर्षयस्तथा।
हव्यवाहं पुरस्कृत्य ब्रह्माणं शरणं गता:॥ १॥
 
 
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- राजन! इसके बाद रावण से पीड़ित ब्रह्मर्षि, देवर्षि और सिद्धों ने अग्निदेव को आगे बढ़ाया और भगवान ब्रह्मा की शरण में गये। 1॥
 
Markandeyaji says- Rajan! After that, Brahmarshi, Devarshi and the Siddhas, who were suffering from Ravana, took Agnidev forward and took refuge in Lord Brahma. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)