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श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  3.275.5 
पुष्पोत्कटा च राका च मालिनी च विशाम्पते।
अन्योन्यस्पर्धया राजन् श्रेयस्कामा: सुमध्यमा:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
महाराज! उनके नाम पुष्पोत्कटा, राका और मालिनी थे। तीनों सुंदरियाँ अपना-अपना भला चाहती थीं। इसीलिए वे आपस में होड़ लगाते हुए ऋषि की सेवा करती थीं।
 
Maharaj! Their names were Pushpotkata, Raka and Malini. All three beauties wanted their own good. That is why they used to serve the sage while competing with each other.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)