Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.275.29: ‘ऐसा ही होगा’ ऐसा कहकर ब्रह्माजी विभीषण के पास गए और बोले, ‘पुत्र! मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, अतः तुम भी वर माँग लो।’ ब्रह्माजी ने यह बात बार-बार दोहराई। | mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तथा भविष्यतीत्युक्त्वा विभीषणमुवाच ह।
वरं वृष्णीष्व पुत्र त्वं प्रीतोऽस्मीति पुन: पुन:॥ २९॥
अनुवाद
‘ऐसा ही होगा’ ऐसा कहकर ब्रह्माजी विभीषण के पास गए और बोले, ‘पुत्र! मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ, अतः तुम भी वर माँग लो।’ ब्रह्माजी ने यह बात बार-बार दोहराई।
Saying 'It will be so', Lord Brahma went to Vibhishan and said, 'Son! I am very pleased with you, so you too ask for a boon.' Lord Brahma repeated this again and again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥