कुम्भकर्णमथोवाच तथैव प्रपितामह:।
स वव्रे महतीं निद्रां तमसा ग्रस्तचेतन:॥ २८॥
अनुवाद
तत्पश्चात् ब्रह्माजी ने कुम्भकर्ण से वर माँगने को कहा, परन्तु उसकी बुद्धि तमोगुण से ग्रस्त थी; अतः उसने अधिक समय तक सोने का वर माँगा ॥28॥
After that Brahmaji asked Kumbhakarna to ask for a boon. But his intellect was affected by Tamo Guna; So he asked for the boon of sleeping for a longer period. 28॥