Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.275.28: तत्पश्चात् ब्रह्माजी ने कुम्भकर्ण से वर माँगने को कहा, परन्तु उसकी बुद्धि तमोगुण से ग्रस्त थी; अतः उसने अधिक समय तक सोने का वर माँगा ॥28॥ | mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुम्भकर्णमथोवाच तथैव प्रपितामह:।
स वव्रे महतीं निद्रां तमसा ग्रस्तचेतन:॥ २८॥
अनुवाद
तत्पश्चात् ब्रह्माजी ने कुम्भकर्ण से वर माँगने को कहा, परन्तु उसकी बुद्धि तमोगुण से ग्रस्त थी; अतः उसने अधिक समय तक सोने का वर माँगा ॥28॥
After that Brahmaji asked Kumbhakarna to ask for a boon. But his intellect was affected by Tamo Guna; So he asked for the boon of sleeping for a longer period. 28॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥