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mahabharat 3.275.26: ब्रह्माजी ने कहा- जिन लोगों का नाम तुमने लिया है, उनमें से तुम्हें किसी से भय नहीं होगा। मनुष्यों के अतिरिक्त तुम्हें अन्य सभी से भय नहीं रहेगा। तुम्हारा कल्याण हो। मैंने तुम्हारे लिए मनुष्यों से भय का विधान किया है॥ 26॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.275.26 
ब्रह्मोवाच
य एते कीर्तिता: सर्वे न तेभ्योऽस्ति भयं तव।
ऋते मनुष्याद् भद्रं ते तथा तद् विहितं मया॥ २६॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा- जिन लोगों का नाम तुमने लिया है, उनमें से तुम्हें किसी से भय नहीं होगा। मनुष्यों के अतिरिक्त तुम्हें अन्य सभी से भय नहीं रहेगा। तुम्हारा कल्याण हो। मैंने तुम्हारे लिए मनुष्यों से भय का विधान किया है॥ 26॥
 
Brahmaji said- You will not fear any of the people whose names you have taken. You should be fearless of all except humans. May you be blessed. I have ordained for you the fear of humans.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)