| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना » श्लोक 25 |
|
| | | | श्लोक 3.275.25  | रावण उवाच
गन्धर्वदेवासुरतो यक्षराक्षसतस्तथा।
सर्पकिन्नरभूतेभ्यो न मे भूयात् पराभव:॥ २५॥ | | | | | | अनुवाद | | रावण ने कहा- प्रभु! मैं गन्धर्वों, देवताओं, दानवों, यक्षों, राक्षसों, नागों, किन्नरों और भूतों से कभी पराजित न होऊँ॥25॥ | | | | Ravana said- Lord! May I never be defeated by Gandharvas, gods, demons, yakshas, demons, snakes, eunuchs and ghosts. 25॥ | | ✨ ai-generated | | |
|
|