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mahabharat 3.275.24: तुम्हारे शरीर में कोई कुरूपता नहीं होगी। तुम इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकोगे और युद्ध में अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करोगे, इसमें संशय नहीं है। ॥24॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.275.24 
वैरूप्यं च न ते देहे कामरूपधरस्तथा।
भविष्यसि रणेऽरीणां विजेता न च संशय:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे शरीर में कोई कुरूपता नहीं होगी। तुम इच्छानुसार कोई भी रूप धारण कर सकोगे और युद्ध में अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करोगे, इसमें संशय नहीं है। ॥24॥
 
There will be no ugliness in your body. You will be able to take any form you want and you will be victorious over your enemies in battle, there is no doubt about it. ॥24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)