Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.275.22: ब्रह्माजी ने कहा - पुत्रो! मैं तुम सब पर प्रसन्न हूँ। वर माँग लो और तपस्या से निवृत्त हो जाओ। अमरता के अतिरिक्त जो भी कुछ चाहे, वह वर माँग ले। उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी। | mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ब्रह्माजी ने कहा - पुत्रो! मैं तुम सब पर प्रसन्न हूँ। वर माँग लो और तपस्या से निवृत्त हो जाओ। अमरता के अतिरिक्त जो भी कुछ चाहे, वह वर माँग ले। उसकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।
Brahmaji said - Sons! I am pleased with all of you. Ask for a boon and retire from penance. Except immortality, whoever wishes for anything, he may ask for that boon. His wish will be fulfilled.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥