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mahabharat 3.275.21: तदनन्तर ब्रह्माजी ने स्वयं जाकर उन सबको तपस्या करने से रोका और प्रत्येक को पृथक्-पृथक् वर देते हुए कहा - ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.275.21 
ततो ब्रह्मा स्वयं गत्वा तपसस्तान्न्यवारयत्।
प्रलोभ्य वरदानेन सर्वानेव पृथक् पृथक्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
तदनन्तर ब्रह्माजी ने स्वयं जाकर उन सबको तपस्या करने से रोका और प्रत्येक को पृथक्-पृथक् वर देते हुए कहा - ॥21॥
 
Thereafter, Brahmaji himself went and stopped them all from doing penance and while giving separate boons to each of them, said – ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)