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mahabharat 3.275.20: एक हज़ार वर्ष पूरे होने पर, क्रूर दशानन ने अपना सिर काटकर अग्नि में आहुति दे दी। उसके इस अद्भुत कार्य से भगवान ब्रह्मा बहुत प्रसन्न हुए।   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.275.20 
पूर्णे वर्षसहस्रे तु शिरश्छित्त्वा दशानन:।
जुहोत्यग्नौ दुराधर्षस्तेनातुष्यज्जगत्प्रभु:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
एक हज़ार वर्ष पूरे होने पर, क्रूर दशानन ने अपना सिर काटकर अग्नि में आहुति दे दी। उसके इस अद्भुत कार्य से भगवान ब्रह्मा बहुत प्रसन्न हुए।
 
After completion of one thousand years, the fierce Dashanan cut off his head and offered it as a sacrifice in the fire. Lord Brahma was very pleased with this wonderful deed of his.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)