Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.275.2: युधिष्ठिर! जब दैत्यों के स्वामी कुबेर को यह ज्ञात हुआ कि मेरे पिता मुझसे रुष्ट हैं, तब वे उन्हें प्रसन्न रखने के लिए प्रयत्न करने लगे॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.275.2 
बुबुधे तं तु सक्रोधं पितरं राक्षसेश्वर:।
कुबेरस्तत्प्रसादार्थं यतते स्म सदा नृप॥ २॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर! जब दैत्यों के स्वामी कुबेर को यह ज्ञात हुआ कि मेरे पिता मुझसे रुष्ट हैं, तब वे उन्हें प्रसन्न रखने के लिए प्रयत्न करने लगे॥ 2॥
 
Yudhishthira! When Kubera, the lord of demons, came to know that my father is angry with me, then he started making efforts to keep him happy.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)