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mahabharat 3.275.16: रावण हज़ारों वर्षों तक एक पैर पर खड़ा रहा। उसने अपना मन एकाग्र रखा और पाँच प्रकार की अग्नियों को भस्म किया तथा वायु का पान किया।   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  3.275.16 
अतिष्ठदेकपादेन सहस्रं परिवत्सरान्।
वायुभक्षो दशग्रीव: पञ्चाग्नि: सुसमाहित:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
रावण हज़ारों वर्षों तक एक पैर पर खड़ा रहा। उसने अपना मन एकाग्र रखा और पाँच प्रकार की अग्नियों को भस्म किया तथा वायु का पान किया।
 
Ravana stood on one leg for thousands of years. He kept his mind focused and consumed the five types of fires and drank air.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)