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mahabharat 3.275.14: एक दिन नरवाहन का वाहन कुबेर महान ऐश्वर्य से विभूषित होकर अपने पिता के साथ बैठा हुआ था। रावण आदि ने उसे उसी अवस्था में देखा॥14॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  3.275.14 
ततो वैश्रवणं तत्र ददृशुर्नरवाहनम्।
पित्रा सार्धं समासीनमृद्धॺा परमया युतम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
एक दिन नरवाहन का वाहन कुबेर महान ऐश्वर्य से विभूषित होकर अपने पिता के साथ बैठा हुआ था। रावण आदि ने उसे उसी अवस्था में देखा॥14॥
 
One day Kubera, the vehicle of Naravahan, was sitting with his father, adorned with great opulence. Ravana and others saw him in the same state.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)