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mahabharat 3.275.13: वे सभी बालक वेदों में पारंगत, वीर योद्धा, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले तथा अपने पिता के साथ गंधमादन पर्वत पर सुखपूर्वक रहने वाले थे॥13॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  3.275.13 
सर्वे वेदविद: शूरा: सर्वे सुचरितव्रता:।
ऊषु: पित्रा सह रता गन्धमादनपर्वते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वे सभी बालक वेदों में पारंगत, वीर योद्धा, ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करने वाले तथा अपने पिता के साथ गंधमादन पर्वत पर सुखपूर्वक रहने वाले थे॥13॥
 
All those boys were well versed in the Vedas, valiant warriors and observed the vow of celibacy and lived happily with their father on the Gandhamadana mountain.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)