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mahabharat 3.275.12: खर एक महान धनुर्धर था। वह ब्राह्मणों से घृणा करता था और मांसाहारी था। शूर्पणखा का रूप अत्यंत भयानक था। वह सिद्ध ऋषियों और मुनियों की तपस्या में विघ्न उत्पन्न करती थी॥12॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  3.275.12 
खरो धनुषि विक्रान्तो ब्रह्मद्विट् पिशिताशन:।
सिद्धविघ्नकरी चापि रौद्री शूर्पणखा तथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
खर एक महान धनुर्धर था। वह ब्राह्मणों से घृणा करता था और मांसाहारी था। शूर्पणखा का रूप अत्यंत भयानक था। वह सिद्ध ऋषियों और मुनियों की तपस्या में विघ्न उत्पन्न करती थी॥12॥
 
Khar was a great archer. He hated Brahmins and was a non-vegetarian. Shurpanakha's appearance was very scary. She used to create problems in the penance of accomplished sages and saints.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)