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mahabharat 3.275.10: रावण के दस सिर थे। वह सबमें ज्येष्ठ और राक्षसों का स्वामी था। वह उत्साह, बल, धैर्य और पराक्रम में भी महान था॥10॥   |   mahabharat अध्याय 3.275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 275: रावण, कुम्भकर्ण, विभीषण, खर और शूर्पणखाकी उत्पत्ति, तपस्या और वरप्राप्ति तथा कुबेरका रावणको शाप देना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  3.275.10 
दशग्रीवस्तु सर्वेषां श्रेष्ठो राक्षसपुङ्गव:।
महोत्साहो महावीर्यो महासत्त्वपराक्रम:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
रावण के दस सिर थे। वह सबमें ज्येष्ठ और राक्षसों का स्वामी था। वह उत्साह, बल, धैर्य और पराक्रम में भी महान था॥10॥
 
Ravana had ten heads. He was the eldest among all and the lord of the demons. He was also great in enthusiasm, strength, patience and valour.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)