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मार्कण्डेय उवाच
पुलस्त्यस्य तु य: क्रोधादर्धदेहोऽभवन्मुनि:।
विश्रवा नाम सक्रोध: स वैश्रवणमैक्षत॥ १॥
अनुवाद
मार्कण्डेयजी कहते हैं- राजन! पुलस्त्यजी के क्रोध के कारण उनके आधे शरीर से प्रकट हुए 'विश्रवा' नामक ऋषि कुबेर की ओर कुपित नेत्रों से देखने लगे॥1॥
Markandeyaji says- Rajan! Due to the anger of Pulastya, the sage named 'Vishrava' who had appeared from half of his body, started looking at Kubera with angry eyes. 1॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥