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mahabharat 3.273.9-10: ऐसी स्त्री को भी मूर्ख और पापी राजा जयद्रथ ने बलपूर्वक हरण कर लिया था। इस हरण के कारण उसका सिर मुँड गया, वह अपने साथियों सहित युद्ध में पराजित हुआ और हम सिन्धु देश की सेना का संहार करके द्रौपदी को वापस ले आए हैं।॥9-10॥   |   mahabharat अध्याय 3.273: अपनी दुरवस्थासे दु:खी हुए युधिष्ठिरका मार्कण्डेय मुनिसे प्रश्न करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 273: अपनी दुरवस्थासे दु:खी हुए युधिष्ठिरका मार्कण्डेय मुनिसे प्रश्न करना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  3.273.9-10 
तां जहार बलाद् राजा मूढबुद्धिर्जयद्रथ:।
तस्या: संहरणात् पाप: शिरस: केशपातनम्॥ ९॥
पराजयं च संग्रामे ससहाय: समाप्तवान्।
प्रत्याहृता तथा स्माभिर्हत्वा तत् सैन्धवं बलम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
ऐसी स्त्री को भी मूर्ख और पापी राजा जयद्रथ ने बलपूर्वक हरण कर लिया था। इस हरण के कारण उसका सिर मुँड गया, वह अपने साथियों सहित युद्ध में पराजित हुआ और हम सिन्धु देश की सेना का संहार करके द्रौपदी को वापस ले आए हैं।॥9-10॥
 
Even such a woman was forcefully abducted by the foolish and sinful King Jayadrath. Because of this abduction, his head was shaved off, he along with his associates were defeated in the war and we have brought back Draupadi after killing the army of Sindhu country.॥ 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)