श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 273: अपनी दुरवस्थासे दु:खी हुए युधिष्ठिरका मार्कण्डेय मुनिसे प्रश्न करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  3.273.6 
मन्ये कालश्च भगवान् दैवं च विधिनिर्मितम्।
भवितव्यं च भूतानां यस्य नास्ति व्यतिक्रम:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मेरी समझ में भगवान् का काल, भाग्य और समस्त प्राणियों का भाग्य, अर्थात् उनके साथ घटने वाली घटनाएँ - ये तीनों ही प्रबल हैं; इन्हें कोई टाल नहीं सकता ॥6॥
 
In my understanding, God's time, destiny, and the fate of all creatures, that is, the events that happen to them - these three are all powerful; no one can avert them. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)