श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 273: अपनी दुरवस्थासे दु:खी हुए युधिष्ठिरका मार्कण्डेय मुनिसे प्रश्न करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.273.2 
वैशम्पायन उवाच
एवं कृष्णां मोक्षयित्वा विनिर्जित्य जयद्रथम्।
आसांचक्रे मुनिगणैर्धर्मराजो युधिष्ठिर:॥ २॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन बोले, 'जनमेजय! जयद्रथ को हराकर तथा द्रौपदी को मुक्त कराकर धर्मराज युधिष्ठिर ऋषियों के समूह के साथ बैठे थे।
 
Vaishmpayana said, 'Janamejaya! After defeating Jaydrath and freeing Draupadi, Dharmaraja Yudhishthira was sitting with the group of sages.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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