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mahabharat 3.272.9: ऐसा कहकर भीम ने अर्धचन्द्राकार बाण से जयद्रथ के लंबे केश काट डाले और पाँच चोटियाँ छोड़ दीं। उस समय वह इतना भयभीत हो गया कि कुछ बोल न सका॥9॥   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  3.272.9 
एवमुक्त्वा सटास्तस्य पञ्च चक्रे वृकोदर:।
अर्धचन्द्रेण बाणेन किंचिदब्रुवतस्तदा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर भीम ने अर्धचन्द्राकार बाण से जयद्रथ के लंबे केश काट डाले और पाँच चोटियाँ छोड़ दीं। उस समय वह इतना भयभीत हो गया कि कुछ बोल न सका॥9॥
 
Saying this, Bhima cut off Jayadratha's long hair with a crescent-shaped arrow and left five plaits. At that time, he was so afraid that he could not speak anything.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)