Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.272.81: तत्पश्चात् मन्दबुद्धि जयद्रथ भी अपने घर चला गया और पाण्डव भी उसी प्रकार उस काम्यकवन में रहने लगे ॥81॥ | mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात् मन्दबुद्धि जयद्रथ भी अपने घर चला गया और पाण्डव भी उसी प्रकार उस काम्यकवन में रहने लगे ॥81॥
After that, the dull-witted Jayadratha also went to his home and the Pandavas started living in the same manner in that Kamyakavan. 81॥
इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि जयद्रथविमोक्षणपर्वणि द्विसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७२॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत जयद्रथविमोक्षणपर्वमें दो सौ बहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७२॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १/२ श्लोक मिलाकर कुल ८१ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥