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mahabharat 3.272.76: अतः अर्जुन को कोई नहीं हरा सकता, क्योंकि देवताओं के लिए भी उसका वेग सहन करना कठिन है; फिर ऐसा कौन पुरुष है जो युद्ध में अर्जुन को परास्त कर सके?   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  3.272.76 
न शक्यते तेन जेतुं त्रिदशैरपि दु:सह:।
क: पुनर्मानुषो भावो रणे पार्थं विजेष्यति॥ ७६॥
 
 
अनुवाद
अतः अर्जुन को कोई नहीं हरा सकता, क्योंकि देवताओं के लिए भी उसका वेग सहन करना कठिन है; फिर ऐसा कौन पुरुष है जो युद्ध में अर्जुन को परास्त कर सके?
 
‘That is why no one can defeat Arjuna. It is difficult even for the gods to bear his ferocity; then who is the man who can defeat Arjuna in battle?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)