vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 75
श्लोक
3.272.75
सहाय: पुण्डरीकाक्ष: श्रीमानतुलविक्रम:।
समानस्यन्दने पार्थमास्थाय परवीरहा॥ ७५॥
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अत्यन्त पराक्रमी भगवान श्रीकृष्ण उसी रथ पर अर्जुन के पास बैठकर उसकी सहायता करते हैं॥75॥
Lord Krishna, the extremely mighty warrior who kills the enemy warriors, sits near Arjun on the same chariot and helps him. 75॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×