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mahabharat 3.272.75: शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अत्यन्त पराक्रमी भगवान श्रीकृष्ण उसी रथ पर अर्जुन के पास बैठकर उसकी सहायता करते हैं॥75॥   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  3.272.75 
सहाय: पुण्डरीकाक्ष: श्रीमानतुलविक्रम:।
समानस्यन्दने पार्थमास्थाय परवीरहा॥ ७५॥
 
 
अनुवाद
शत्रु योद्धाओं का संहार करने वाले अत्यन्त पराक्रमी भगवान श्रीकृष्ण उसी रथ पर अर्जुन के पास बैठकर उसकी सहायता करते हैं॥75॥
 
Lord Krishna, the extremely mighty warrior who kills the enemy warriors, sits near Arjun on the same chariot and helps him. 75॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)