Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 3.272.73-74: सिन्धुराज! विद्वान् पुरुष उसी भगवान् की स्तुति करते हैं और उसके पवित्र चरित्रों का वर्णन करते हैं। वे अपराजित, शंख-चक्रधारी, पीतवर्णी मणियों से विभूषित और श्रीवत्साधारी भगवान् श्रीकृष्ण कहे गए हैं। शस्त्रविद्या के विद्वानों में श्रेष्ठ अर्जुन की रक्षा वही भगवान् श्रीकृष्ण करते हैं। 73-74॥ | mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 3: वन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सिन्धुराज! विद्वान् पुरुष उसी भगवान् की स्तुति करते हैं और उसके पवित्र चरित्रों का वर्णन करते हैं। वे अपराजित, शंख-चक्रधारी, पीतवर्णी मणियों से विभूषित और श्रीवत्साधारी भगवान् श्रीकृष्ण कहे गए हैं। शस्त्रविद्या के विद्वानों में श्रेष्ठ अर्जुन की रक्षा वही भगवान् श्रीकृष्ण करते हैं। 73-74॥
Sindhuraj! Learned men sing the praises of the same God and describe his holy characters. He has been called the undefeated, conch-chakra-clad Lord Shri Krishna, adorned with yellow-coloured stones and adorned with Shrivatsadhari. Arjun, the best among the scholars of weaponry, is protected by the same Lord Shri Krishna. 73-74॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥