श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  3.272.69 
विक्रमैस्त्रिभिरक्षोभ्यो जहाराशु स मेदिनीम्।
ददौ शक्राय च महीं विष्णुर्देव: सनातन:॥ ६९॥
 
 
अनुवाद
उन अविनाशी सनातन भगवान विष्णु ने शीघ्र ही तीन पग में सारा जल नापकर इन्द्र को समर्पित कर दिया ॥69॥
 
That incorruptible eternal Lord Vishnu quickly measured all the water in three steps and dedicated it to Lord Indra. 69॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)