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mahabharat 3.272.66-67: ब्रह्मन्! मैं आपके दर्शन पाकर अत्यन्त प्रसन्न हूँ। कृपया बताइए, आपकी सेवा के बदले मैं आपको क्या दूँ?' बलि के ऐसा कहने पर भगवान वामन ने बलि को 'आपका कल्याण हो' कहकर आशीर्वाद दिया और मुस्कुराते हुए कहा - 'दैत्यराज! मुझे तीन पग भूमि दे दीजिए।'   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 66-67
 
 
श्लोक  3.272.66-67 
प्रीतोऽस्मि दर्शने विप्र ब्रूहि त्वं किं ददानि ते।
एवमुक्तस्तु बलिना वामन: प्रत्युवाच ह॥ ६६॥
स्वस्तीत्युक्त्वा बलिं देव: स्मयमानोऽभ्यभाषत।
मेदिनीं दानवपते देहि मे विक्रमत्रयम्॥ ६७॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्मन्! मैं आपके दर्शन पाकर अत्यन्त प्रसन्न हूँ। कृपया बताइए, आपकी सेवा के बदले मैं आपको क्या दूँ?' बलि के ऐसा कहने पर भगवान वामन ने बलि को 'आपका कल्याण हो' कहकर आशीर्वाद दिया और मुस्कुराते हुए कहा - 'दैत्यराज! मुझे तीन पग भूमि दे दीजिए।'
 
Brahman! I am very pleased to see you. Please tell me, what should I give you for your service?' When Bali said this, Lord Vaman blessed Bali saying 'May you be blessed' and said smilingly - 'Demon King! Give me three steps of land.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)