श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  3.272.65 
बृहस्पतिसहायोऽसौ प्रविष्टो बलिनो मखे।
तं दृष्ट्वा वामनतनुं प्रहृष्टो बलिरब्रवीत्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
‘बृहस्पतिजी की सहायता से उन्होंने बलि की यज्ञवेदी में प्रवेश किया। वामनरूप में भगवान को देखकर राजा बलि अत्यंत प्रसन्न हुए और बोले-॥65॥
 
‘With the help of Brihaspatiji, he entered Bali's sacrificial altar. Seeing the Lord in the form of Vamana, King Bali became very happy and said -॥ 65॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)