श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.272.47 
सृज्यते ब्रह्ममूर्तिस्तु रक्षते पौरुषी तनु:।
रौद्रीभावेन शमयेत् तिस्रोऽवस्था: प्रजापते:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
‘भगवान ब्रह्माजी के रूप में सृष्टि करते हैं। परब्रह्म नारायण के रूप में उसकी रक्षा करते हैं और रुद्र के रूप में सबका संहार करते हैं। इस प्रकार प्रजापालक भगवान के ये तीन चरण हैं ॥47॥
 
‘God creates in the form of Brahmaji. The Supreme Being protects it in the form of Narayana and destroys everyone in the form of Rudra. Thus, these are the three stages of the people-protector God. 47॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)