श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.272.46 
तेऽसृजन् सर्वभूतानि त्रसानि स्थावराणि च।
यक्षराक्षसभूतानि पिशाचोरगमानुषान्॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
‘उन महर्षियों ने समस्त स्थावर-जंगम प्राणियों को तथा यक्ष, राक्षस, भूत, पिशाच, सर्प और मनुष्यों को भी उत्पन्न किया।॥46॥
 
‘Those great sages created all the mobile and immobile beings as well as yakshas, ​​demons, ghosts, vampires, serpents and humans.॥ 46॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)