श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  3.272.20 
तमुवाच घृणी राजा धर्मपुत्रो युधिष्ठिर:।
तथा जयद्रथं दृष्ट्वा गृहीतं सव्यसाचिना॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस समय अर्जुन ने (आदरपूर्वक) जयद्रथ का हाथ पकड़ लिया। तब दयालु धर्मपुत्र राजा युधिष्ठिर ने जयद्रथ की ओर देखकर कहा -॥20॥
 
At that time Arjuna held the hand of Jayadratha (out of respect). Then the kind King Yudhishthira, son of Dharma, looked at Jayadratha and said -॥20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)