श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  3.272.2 
तं भीमसेनो धावन्तमवतीर्य रथाद् बली।
अभिद्रुत्य निजग्राह केशपक्षे ह्यमर्षण:॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसे भागते देख महाबली भीम क्रोध में भरकर अपने रथ से उतर पड़े और बड़ी तेजी से दौड़कर उसके केश पकड़ लिये।
 
Seeing him flee, the mighty Bhima, filled with anger, alighted from his chariot and ran with great speed and caught hold of his hair.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)