श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  3.272.18 
द्रौपदी चाब्रवीद् भीममभिप्रेक्ष्य युधिष्ठिरम्।
दासोऽयं मुच्यतां राज्ञस्त्वया पञ्चसट: कृत:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
उस समय द्रौपदी ने भी युधिष्ठिर की ओर देखकर भीमसेन से कहा, 'आपने इसका सिर मुंडवा दिया है और पाँच चोटियाँ छोड़ दी हैं और यह राजा का सेवक बन गया है; अतः अब कृपया इसे छोड़ दीजिए।'
 
At that time Draupadi also looked at Yudhishthira and said to Bhimasena, 'You have shaved his head and left five plaits and he has become the servant of the King; therefore please release him now.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)