श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  3.272.17 
तमुवाच ततो ज्येष्ठो भ्राता सप्रणयं वच:।
मुञ्चैनमधमाचारं प्रमाणा यदि ते वयम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तब बड़े भाई युधिष्ठिर ने भीमसेन से प्रेमपूर्वक कहा, 'यदि आप मेरी बात से सहमत हैं, तो इस पापी को छोड़ दीजिए।'
 
Then Yudhishthira, the elder brother, lovingly said to Bhimasena, 'If you agree with me, then release this sinner.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)