vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 3: वन पर्व
»
अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन
»
श्लोक 17
श्लोक
3.272.17
तमुवाच ततो ज्येष्ठो भ्राता सप्रणयं वच:।
मुञ्चैनमधमाचारं प्रमाणा यदि ते वयम्॥ १७॥
अनुवाद
तब बड़े भाई युधिष्ठिर ने भीमसेन से प्रेमपूर्वक कहा, 'यदि आप मेरी बात से सहमत हैं, तो इस पापी को छोड़ दीजिए।'
Then Yudhishthira, the elder brother, lovingly said to Bhimasena, 'If you agree with me, then release this sinner.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×