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mahabharat 3.272.15: भीम ने जयद्रथ को उसी अवस्था में राजा के सामने उपस्थित किया। उसे देखकर राजा युधिष्ठिर जोर-जोर से हंसने लगे और बोले - 'अब इसे जाने दो'॥15॥   |   mahabharat अध्याय 3.272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 272: भीमद्वारा बंदी होकर जयद्रथका युधिष्ठिरके सामने उपस्थित होना, उनकी आज्ञासे छूटकर उसका गंगाद्वारमें तप करके भगवान् शिवसे वरदान पाना तथा भगवान् शिवद्वारा अर्जुनके सहायक भगवान् श्रीकृष्णकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  3.272.15 
दर्शयामास भीमस्तु तदवस्थं जयद्रथम्।
तं राजा प्राहसद् दृष्ट्वा मुच्यतामिति चाब्रवीत्॥ १५॥
 
 
अनुवाद
भीम ने जयद्रथ को उसी अवस्था में राजा के सामने उपस्थित किया। उसे देखकर राजा युधिष्ठिर जोर-जोर से हंसने लगे और बोले - 'अब इसे जाने दो'॥15॥
 
Bhima presented Jayadratha in the same condition before the king. Seeing him, King Yudhishthira started laughing loudly and said - 'Now let him go'.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)