| श्री महाभारत » पर्व 3: वन पर्व » अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना » श्लोक 60 |
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| | | | श्लोक 3.271.60  | इत्युच्यमान: पार्थेन सैन्धवो न न्यवर्तत।
तिष्ठ तिष्ठेति तं भीम: सहसाभ्यद्रवद् बली।
मा वधीरिति पार्थस्तं दयावान् प्रत्यभाषत॥ ६०॥ | | | | | | अनुवाद | | अर्जुन के इस प्रकार ताना मारने पर भी सिंधुराज वापस नहीं लौटा। तब महाबली भीम सहसा उसके पीछे दौड़े और बोले, 'ठहरो, रुको।' उस समय दयालु अर्जुन ने उससे कहा, 'भैया! इसे मत मारो।' | | | | Even after Arjuna taunted him in this manner, Sindhuraj did not return. Then the mighty Bhima suddenly ran after him, saying, 'Wait, wait.' At that time, the kind Arjuna said to him, 'Brother! Do not kill him.' | | | इति श्रीमहाभारते वनपर्वणि द्रौपदीहरणपर्वणि जयद्रथपलायने एकसप्तत्यधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २७१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत वनपर्वके अन्तर्गत द्रौपदीहरणपर्वमें जयद्रथपलायनविषयक
दो सौ इकहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २७१॥ | | | | ✨ ai-generated | | |
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