Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 3.271.55: तत्पश्चात् भीम और अर्जुन दोनों वीर जयद्रथ के पीछे दौड़े। वह अकेला तो था ही, घोड़ों द्वारा मारे जाने से भी अत्यन्त भयभीत था। उसके हृदय में चिन्ता उत्पन्न हो रही थी। 55॥   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  3.271.55 
ततोऽभ्यधावतां वीरावुभौ भीमधनंजयौ।
हताश्वं सैन्धवं भीतमेकं व्याकुलचेतसम्॥ ५५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भीम और अर्जुन दोनों वीर जयद्रथ के पीछे दौड़े। वह अकेला तो था ही, घोड़ों द्वारा मारे जाने से भी अत्यन्त भयभीत था। उसके हृदय में चिन्ता उत्पन्न हो रही थी। 55॥
 
After that both the brave men Bhima and Arjuna ran after Jayadratha. Not only was he alone, he was also very scared of being killed by the horses. There was anxiety in his heart. 55॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)