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mahabharat 3.271.51: ब्राह्मणों से घिरे हुए राजा युधिष्ठिर वहीं बैठ गए और भामिनी कृष्ण नकुल और सहदेव के साथ आश्रम के अंदर चले गए।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  3.271.51 
स तै: परिवृतो राजा तत्रैवोपविवेश ह।
प्रविवेशाश्रमं कृष्णा यमाभ्यां सह भाविनी॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मणों से घिरे हुए राजा युधिष्ठिर वहीं बैठ गए और भामिनी कृष्ण नकुल और सहदेव के साथ आश्रम के अंदर चले गए।
 
Surrounded by the brahmins, King Yudhishthira sat there and Bhamini Krishna went inside the hermitage along with Nakula and Sahadeva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)