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mahabharat 3.271.50: ऋषिगण यह देखकर बहुत प्रसन्न हुए कि राजा सिन्धु और सौवीरों के क्षत्रियों को हराकर लौट आए हैं और देवी द्रौपदी भी आश्रम में लौट आई हैं ॥50॥   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 50
 
 
श्लोक  3.271.50 
ते स्म तं मुदिता दृष्ट्वा पुन: प्रत्यागतं नृपम्।
जित्वा तान् सिन्धुसौवीरान् द्रौपदीं चाहृतां पुन:॥ ५०॥
 
 
अनुवाद
ऋषिगण यह देखकर बहुत प्रसन्न हुए कि राजा सिन्धु और सौवीरों के क्षत्रियों को हराकर लौट आए हैं और देवी द्रौपदी भी आश्रम में लौट आई हैं ॥50॥
 
The sages were very pleased to see that the King has returned after defeating the Kshatriyas of Sindhu and Sauviras and that Goddess Draupadi has also returned to the ashram. ॥50॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)