श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  3.271.47 
इत्युक्तौ तौ नरव्याघ्रौ ययतुर्यत्र सैन्धव:।
राजा निववृते कृष्णामादाय सपुरोहित:॥ ४७॥
 
 
अनुवाद
द्रौपदी के ऐसा कहने पर दोनों श्रेष्ठ पुरुष उसी दिशा में चले, जिस ओर जयद्रथ गया था। राजा युधिष्ठिर द्रौपदी को पुरोहित धौम्य के साथ लेकर आश्रम की ओर चल पड़े।
 
Upon Draupadi saying this, both the best of men proceeded in the same direction in which Jayadratha had gone. And King Yudhishthira took Draupadi along with the priest Dhoumya and proceeded to the hermitage.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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