श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  3.271.46 
भार्याभिहर्ता वैरी यो यश्च राज्यहरो रिपु:।
याचमानोऽपि संग्रामे न मोक्तव्य: कथंचन॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
यदि युद्ध में तुम्हें कोई ऐसा शत्रु मिले जिसने तुम्हारी पत्नी का अपहरण कर लिया हो और तुम्हारा राज्य हड़प लिया हो तथा वह तुम्हारे प्राणों की भीख मांगे, तो तुम्हें उसे किसी भी हालत में जीवित नहीं छोड़ना चाहिए।'
 
If you find an enemy in battle who has kidnapped your wife and usurped your kingdom and he begs for your life, you should not leave him alive under any circumstances.'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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