श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  3.271.43 
युधिष्ठिर उवाच
न हन्तव्यो महाबाहो दुरात्मापि स सैन्धव:।
दु:शलामभिसंस्मृत्य गान्धारीं च यशस्विनीम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर बोले- महाबाहो! यद्यपि सिन्धुराज जयद्रथ बड़ा दुष्टात्मा है; परंतु बहन दुशाला तथा प्रसिद्ध माता गांधारी का स्मरण करके उसे मत मारो। 43॥
 
Yudhishthir said – Great arms! Although Sindhuraj Jayadratha is a very evil soul; However, remembering sister Dushaala and famous mother Gandhari, do not kill her. 43॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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