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mahabharat 3.271.4: भीमसेन हाथ में वह विशाल गदा लिये हुए, जिसका ऊपरी भाग सोने के पत्र से मढ़ा हुआ था और जिसकी पूरी गदा शैक्य नामक लोहे की बनी हुई थी, काल से प्रेरित होकर जयद्रथ की ओर दौड़े।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  3.271.4 
हेमचित्रसमुत्सेधां सर्वशैक्यायसीं गदाम्।
प्रगृह्याभ्यद्रवद् भीम: सैन्धवं कालचोदितम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
भीमसेन हाथ में वह विशाल गदा लिये हुए, जिसका ऊपरी भाग सोने के पत्र से मढ़ा हुआ था और जिसकी पूरी गदा शैक्य नामक लोहे की बनी हुई थी, काल से प्रेरित होकर जयद्रथ की ओर दौड़े।
 
Holding in his hand that huge mace, whose upper portion was adorned with gold leaf and whose entire mace was made of iron called Shaikya, Bhimasena ran towards Jayadratha, inspired by time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)