श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  3.271.39 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्तो भीमसेनस्तु गुडाकेशेन धीमता।
युधिष्ठिरमभिप्रेक्ष्य वाग्मी वचनमब्रवीत्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय ! बुद्धिमान अर्जुन के ऐसा कहने पर बातचीत में कुशल भीमसेन ने युधिष्ठिर की ओर देखकर कहा - 39॥
 
Vaishampayanji says – Janamejaya! When the wise Arjuna said this, Bhimasena, skilled in conversation, looked at Yudhishthira and said - 39॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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