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mahabharat 3.271.37: अर्जुन बोले- मैं इस युद्धस्थल में जयद्रथ को भी नहीं देख रहा, जिसकी क्रूरता के कारण हमें इतना असहनीय कष्ट सहना पड़ा है।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  3.271.37 
अर्जुन उवाच
यस्यापचारात् प्राप्तोऽयमस्मान् क्लेशो दुरासद:।
तमस्मिन् समरोद्देशे न पश्यामि जयद्रथम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले- मैं इस युद्धस्थल में जयद्रथ को भी नहीं देख रहा, जिसकी क्रूरता के कारण हमें इतना असहनीय कष्ट सहना पड़ा है।
 
Arjun said - I do not even see Jaydratha in this battle-field, due to whose cruelty we have had to endure such unbearable suffering.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)