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mahabharat 3.271.26: सारथि के नष्ट हो जाने के कारण कोटिकास्य को युद्ध से विमुख होते देख, योद्धाओं में श्रेष्ठ पाण्डुनन्दन भीमसेन ने उसके पास जाकर प्रसा नामक कुंद अस्त्र से उसे मार डाला ॥26॥   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  3.271.26 
विमुखं हतसूतं तं भीम: प्रहरतां वर:।
जघान तलयुक्तेन प्रासेनाभ्येत्य पाण्डव:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
सारथि के नष्ट हो जाने के कारण कोटिकास्य को युद्ध से विमुख होते देख, योद्धाओं में श्रेष्ठ पाण्डुनन्दन भीमसेन ने उसके पास जाकर प्रसा नामक कुंद अस्त्र से उसे मार डाला ॥26॥
 
Seeing Kotikasya turning away from the battle due to the destruction of the charioteer, Pandunandan Bhimasena, the best among warriors, went near him and killed him with a blunt weapon called Prasa. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)