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mahabharat 3.271.24: यहाँ भीमसेन ने राजा कोटिकास्य के सारथी का सिर चाकू से काट दिया, जो उस समय युद्ध में उन पर आक्रमण कर रहा था और घोड़ों को हाँक रहा था।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  3.271.24 
भीमस्त्वापततो राज्ञ: कोटिकास्यस्य सङ्गरे।
सूतस्य नुदतो वाहान् क्षुरेणापाहरच्छिर:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
यहाँ भीमसेन ने राजा कोटिकास्य के सारथी का सिर चाकू से काट दिया, जो उस समय युद्ध में उन पर आक्रमण कर रहा था और घोड़ों को हाँक रहा था।
 
Here Bhimasena beheaded with a knife the charioteer of King Kotikasya, who was attacking him in the battle and was driving the horses at that time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)