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mahabharat 3.271.21: लेकिन नकुल ने अपनी तलवार से अपने पास आए हाथी की सूँड़ को उसके दाँतों सहित काट डाला।   |   mahabharat अध्याय 3.271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना   ।   mahabharat पर्व 3: वन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 3: वन पर्व  »  अध्याय 271: पाण्डवोंद्वारा जयद्रथकी सेनाका संहार, जयद्रथका पलायन, द्रौपदी तथा नकुल-सहदेवके साथ युधिष्ठिरका आश्रमपर लौटना तथा भीम और अर्जुनका वनमें जयद्रथका पीछा करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  3.271.21 
नकुलस्तस्य नागस्य समीपपरिवर्तिन:।
सविषाणं भुजं मूले खड्गेन निरकृन्तत॥ २१॥
 
 
अनुवाद
लेकिन नकुल ने अपनी तलवार से अपने पास आए हाथी की सूँड़ को उसके दाँतों सहित काट डाला।
 
But Nakula, with his sword, cut off the trunk of the elephant that came near him, along with its teeth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)