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श्लोक 3.271.19  |
नकुलस्त्वपभीस्तस्माद् रथाच्चर्मासिपाणिमान्।
उद्भ्रान्तं स्थानमास्थाय तस्थौ गिरिरिवाचल:॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| लेकिन नकुल को ज़रा भी डर नहीं लगा। वह ढाल और तलवार हाथ में लेकर रथ से कूद पड़ा और एक सुरक्षित स्थान पर आकर पर्वत की तरह स्थिर खड़ा हो गया। |
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| But Nakula was not afraid at all. He jumped out of the chariot with his shield and sword in his hands and came to a safe place and stood as still as a mountain. |
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